NEET-UG 2025 में एक बहुत ही Emotinol मामला पता चला है। तमिलनाडु की एक मेधावी छात्रा (NEET UG तमिलनाडु छात्रा मामला) ने समय पर फीस जमा न कर पाने की वजह से अपनी MBBS सीट को खो दी। अब छात्रा ने अपने भविष्य को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इस खबर से लाखों छात्रों मे सनसनी बनी हुई है और कितने लोगों के लिए ये गंभीर मामला बन गया है।
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सीट मिलने के बाद फीस जमा करने में हुई देरी
रिपोर्ट्स के अनुसार, छात्रा को आलॉटमेंट सूची में MBBS की सीट मिली थी और उसे निश्चित समय सीमा के अंदर एडमिशन फीस जमा करनी थी। लेकिन कुछ तकनीकी परेशानियों और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण वह समय पर फीस जमा नहीं कर पाई।
नतीजा—
कॉलेज ने उसकी सीट रद्द कर दी, और इसके बाद उसे दूसरी लिस्ट में भी अवसर नहीं मिला।

छात्रा ने सुप्रीम कोर्ट से क्या मांगा है?
याचिका में छात्रा ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि—
- उसकी MBBS सीट वापस दिलाई जाए
- फीस भुगतान में हुई देरी को मानवीय आधार पर माफ किया जाए
- NEET-UG काउंसिलिंग में छात्रों को अधिक समय और लचीली समय-सीमा दी जाए
काउंसिलिंग से जुड़े नियम सख्त, लेकिन…
NMC और MCC की गाइडलाइन के अनुसार, अगर कोई छात्र समय पर फीस जमा नहीं करता तो उसकी सीट स्वतः कैंसिल हो जाती है। लेकिन कई विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में:
- छात्रों को ग्रेस पीरियड मिलना चाहिए
- मेडिकल सीट जैसी गंभीर चीज़ के लिए बेहतर हेल्पलाइन और सपोर्ट सिस्टम होना चाहिए

निष्कर्ष (Conclusion)
तमिलनाडु की इस छात्रा का मामला देश के लाखों छात्रों के लिए एक बहुत बड़ा सबक है। NEET-UG जैसे हार्ड एग्जाम को पास करने के बाद भी प्रोसीजर में थोड़ी-सी देरी से सीट गंवाना बेहद दुखद है। इसलिए नियम मे थोड़ी ढील देनी चाहिए जो की बहुत जरूरी है। ऐसी और भी जरूरी जानकारी के लिए हमारी वेबसाईट के Notification को Allow कर ले धन्यवाद !






