देश में उच्च शिक्षा को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से PhD थीसिस लिखने वाले छात्रों पर सख्ती शुरू हो गई है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कई विश्वविद्यालयों की थीसिस की जांच की है।
इसी कड़ी में बिहार के बीआर अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) की दर्जनों PhD थीसिस को वापस लौटा दिया गया है। इन थीसिस पर AI के गलत इस्तेमाल और रिसर्च में अनियमितता का शक जताया गया है।
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क्यों सख्त हुआ UGC
पिछले कुछ समय से यह देखा जा रहा था कि कई छात्र रिसर्च में खुद मेहनत करने के बजाय AI टूल्स का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे रिसर्च की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे थे।
UGC का मानना है कि PhD जैसी उच्च डिग्री में मौलिक शोध सबसे जरूरी होता है। अगर छात्र मशीन से लिखवाया गया कंटेंट जमा करेंगे, तो इससे शिक्षा व्यवस्था कमजोर होगी।
BRABU की थीसिस क्यों लौटीं
BRABU के दर्जनों छात्रों ने अपनी PhD थीसिस में AI जैसे ChatGPT या इसी तरह के टूल्स से लिखी सामग्री कॉपी-पेस्ट कर दी। UGC की जांच में ये बात सामने आई कि थीसिस में काफी हिस्सा मूल नहीं था। UGC ने इन्हें स्वीकार नहीं किया और वापस कर दिया। पीआरओ राजेश कुमार ने बताया कि इन शोध छात्रों को थीसिस दोबारा लिखने को कहा गया है। आगे से ऐसी गड़बड़ी न हो, इसके लिए थीसिस जांच में टर्निटिन जैसे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है।
AI के इस्तेमाल पर क्या है नियम
सूत्रों और शिक्षकों के मुताबिक सबसे ज्यादा AI चोरी अंग्रेजी में लिखी थीसिस में पकड़ी गई। टर्निटिन सॉफ्टवेयर अंग्रेजी में प्लेजरिज्म यानी नकल को बहुत बेहतर ढंग से पकड़ता है क्योंकि इसमें गणितीय मॉडल मजबूत हैं, लेकिन हिंदी में इतनी चोरी नहीं पकड़ी जा रही जो चिंता का विषय है। शिक्षकों का कहना है कि हिंदी में प्लेजरिज्म जांच कमजोर है और इसे ठीक करने के लिए बड़ी तैयारी चल रही है। UGC के पास पूरे देश की थीसिस का रिकॉर्ड है और यहीं से ये गड़बड़ियां पकड़ी जा रही हैं।
UGC ने PhD में AI के दुरुपयोग पर पहले से ही चेतावनी दी हुई है.2018 के प्लेजरिज्म नियम अभी लागू हैं, लेकिन AI कंटेंट को अनअकनॉलेज्ड इस्तेमाल को प्लेजरिज्म माना जा रहा है। कई यूनिवर्सिटी AI चेक को प्लेजरिज्म टूल्स में शामिल कर रही हैं। AICTE जैसी संस्थाओं ने सुझाव दिया है कि AI का इस्तेमाल 20% से कम हो और सही तरीके से साइट किया जाए। UGC भी इसी दिशा में काम कर रहा है ताकि रिसर्च की गुणवत्ता बनी रहे।
रिसर्च गाइड की भी बढ़ेगी जिम्मेदारी
अब केवल छात्रों पर ही नहीं, बल्कि उनके गाइड और सुपरवाइजर पर भी जिम्मेदारी बढ़ गई है।
गाइड को यह सुनिश्चित करना होगा कि:
• थीसिस मौलिक हो
• AI का गलत इस्तेमाल न हो
• सभी नियमों का पालन हो
• समय-समय पर समीक्षा हो
JRF क्वालिफाइड छात्रों के लिए अच्छी खबर
वर्ष 2025 में JRF क्वालिफाइड छात्रों की PhD में लेटर एंट्री यानी नामांकन पर विचार किया जा रहा है। विधि शासन ने कई छात्रों से सवाल-जवाब किए हैं। उन्होंने 2025 में JRF क्वालिफाइड छात्रों का ही इंटेक रखने का मन बनाया है। कई छात्रों ने बताया कि उन्होंने JRF परीक्षा पास की लेकिन रजिस्ट्रेशन नहीं ले सके और JRF की वैधता खत्म हो गई। राम कुमार ने कहा कि छात्रों को नामांकन रजिस्ट्रेशन नोटिफिकेशन देने का आश्वासन दिया है, ताकि JRF बेकार न हो।
छात्रों के लिए जरूरी सलाह
जो छात्र PhD कर रहे हैं, उन्हें अब कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।
• खुद रिसर्च करें
• ओरिजिनल डेटा इस्तेमाल करें
• AI का सीमित उपयोग करें
• नियमित गाइड से चर्चा करें
• प्लेजरिज्म चेक जरूर करें
FAQs – AI और PhD Thesis
Q1. UGC ने PhD थीसिस पर सख्ती क्यों की है?
UGC रिसर्च की गुणवत्ता बनाए रखने और मौलिकता बढ़ाने के लिए AI के गलत इस्तेमाल पर सख्ती कर रहा है।
Q2. क्या PhD में AI का इस्तेमाल पूरी तरह बैन है?
नहीं, AI का सीमित उपयोग जैसे ग्रामर चेक और डेटा एनालिसिस के लिए किया जा सकता है, लेकिन पूरा कंटेंट AI से लिखवाना गलत है।
Q3. अगर थीसिस में AI का गलत इस्तेमाल हो जाए तो क्या होगा?
थीसिस रिजेक्ट हो सकती है, सुधार के लिए लौटाई जा सकती है या डिग्री में देरी हो सकती है।






