लखनऊ के लोगों के लिए यह किसी प्रेरणा से कम नहीं है। जहां कभी 65 एकड़ क्षेत्र में फैला 30 फीट ऊंचा कूड़े का पहाड़ हुआ करता था, वहीं आज Rashtriya Prerna Sthal बनकर शहर की नई पहचान बन चुका है। यह बदलाव सिर्फ एक स्थान का नहीं, बल्कि स्वच्छता, पर्यावरण और विकास की सोच का प्रतीक है।
इसे भी पढे ! Women EV Scooter Subsidy 2026: महिलाओं को इलेक्ट्रिक स्कूटर पर ₹45,000 तक की सरकारी सब्सिडी
बदली तस्वीर से अब दुर्गंध की जगह खुशबू
‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ को भारतीय राष्ट्रवाद की त्रयी कहे जाने वाले डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीन दयाल उपाध्याय और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों और अमूल्य योगदान को जन-जन तक पहुंचाने का अनुपम प्रयास माना जा रहा है। राष्ट्र प्रेरणा स्थल को कमल की आकृति में बनाया गया है।
प्रेरणा स्थल में राष्ट्रवाद के शिखर पुरुषों डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं दीन दयाल उपाध्याय और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 65-65 फुट ऊंची कांस्य प्रतिमाओं का निर्माण किया गया है। जिनका निर्माण विश्व विख्यात मूर्तिकार राम सुतार और मातू राम आर्ट क्रिएशंस ने किया है। परिसर में राष्ट्र नायकों को समर्पित संग्रहालय का निर्माण भी किया गया है। संग्रहालय की इंटरप्रिटेशन वाल पर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के म्यूरल आर्ट से देश की राष्ट्रीयता की यात्रा को दर्शाया गया है।
संग्रहालय के कोर्टयार्ड में राष्ट्रीय भावना की प्रतीक भारत माता की प्रतिमा स्थापित की गई है। राष्ट्र नायकों को समर्पित गैलरियां उनके जीवन, विचारधारा और संघर्षों को जीवंत बनाती हैं। साथ ही राष्ट्र प्रेरणा स्थल परिसर में सिंथेटिक ट्रैक, मेडिटेशन सेंटर, विपश्यना केंद्र, योग केंद्र, हेलीपैड और कैफेटेरिया का भी निर्माण किया गया है। इसके अलावा परिसर में 3000 की क्षमता वाले एम्फीथिएटर और लगभग दो लाख की क्षमता के रैली स्थल का भी निर्माण किया गया है। राष्ट्र प्रेरणा स्थल न केवल ऐतिहासिक स्मृति का बिंदु है, बल्कि भावी पीढ़ियों में राष्ट्रीयता की भावना का संचार करेगा।

Rashtriya Prerna Sthal की खास बातें
राष्ट्र प्रेरणा स्थल को सिर्फ एक पार्क नहीं, बल्कि प्रेरणा और गर्व का केंद्र बनाया गया है।
- कुल क्षेत्रफल: लगभग 65 एकड़
- पहले: 30 फीट ऊंचा कूड़े का पहाड़
- अब: हरियाली, खुले रास्ते और शांत वातावरण
- आम जनता के लिए खुला
विजेंद्र एनर्जी कंपनी काे दी गई पालीथिन
कूड़े से निकली करीब पंद्रह प्रतिशत पालीथिन का उपयोग मेरठ की विजेंद्र एनर्जी कंपनी को दे दिया गया था, जिसका उपयोग बिजली बनाने में आया। घैला में 1990 से लेकर 1997 तक एकत्र हुए कूड़े में समय समय में आग लगा दी जाती तो मीथेन बनने से धुएं का गुबार दिखता था और कहीं कहीं आग की लौ दिखती थी। दमकल वाहनों को बुलाकर उसे बुझाया जाता था तो बारिश में पानी से भीगे कूड़े की दुर्गंध दूर तक जाती थी। पूरे इलाके के पर्यावरण को बीमार कर रहे कूड़े के पहाड़ ने लोगों सांस रोगी बना दिया था। कूलर व ऐसी से कूड़े की दुर्गंध घरों तक में पहुंच जाती थी।
वर्ष 1997 से घैला में कूड़ा एकत्र होना तो बंद हो गया था लेकिन दूर से दिखने वाला कूड़े का पहाड़ मुसीबत कम नहीं कर रहा था। 2020 में शासन ने घैला के कूड़े के पहाड़ को खत्म करने का निर्णय लिया और जलनिगम की कांस्ट्क्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएंडडीएस) को कार्यदायी संस्था तैनात किया गया।
शासन स्तर पर हुए ग्लोबल टेंडर में 2021 में यह काम लखनऊ की मुस्कान संस्था को 13 करोड़ में दिया गया। मशीनों की मदद से कूड़े की छनाई की गई और मिट्टी को अलग करने का काम किया गया। तीन वर्ष में 80 प्रतिशत मिट्टी को अलग करके उसे जगह-जगह भराई में उपयोग किया।
लखनऊ के लिए क्यों खास है राष्ट्र प्रेरणा स्थल?
लखनऊ सिर्फ अपनी तहजीब और इतिहास के लिए नहीं, बल्कि अब आधुनिक और स्वच्छ विकास मॉडल के लिए भी जाना जा रहा है। Rashtriya Prerna Sthal इसका बेहतरीन उदाहरण है, जो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है।

Rashtriya Prerna Sthal – FAQs
Q1. Rashtriya Prerna Sthal कहां स्थित है?
Rashtriya Prerna Sthal लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में स्थित है।
Q2. पहले यहां क्या था?
पहले यहां लगभग 65 एकड़ क्षेत्र में 30 फीट ऊंचा कूड़े का पहाड़ था।
Q3. कूड़े के पहाड़ को कैसे हटाया गया?
कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण, जमीन का ट्रीटमेंट और हरियाली विकसित करके इसे बदला गया।
Q4. क्या आम लोग Rashtriya Prerna Sthal घूम सकते हैं?
हां, यह स्थल आम जनता के लिए खुला है।






