स्मार्ट मीटर पर सीएम योगी का बड़ा एक्शन: ओवरबिलिंग की जांच के लिए बनेगी समिति

उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ रही शिकायतों के बीच बड़ा कदम उठाया गया है। योगी आदित्यनाथ ने स्मार्ट मीटर में आ रही ओवरबिलिंग (ज्यादा बिल) की समस्या को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। अब इस मामले की जांच के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाई जाएगी, जो पूरी व्यवस्था की जांच कर रिपोर्ट तैयार करेगी। इस फैसले से लाखों बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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क्या है पूरा मामला?

पिछले कुछ समय से कई उपभोक्ताओं की शिकायत थी कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनके बिजली बिल पहले के मुकाबले ज्यादा आ रहे हैं।

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लोगों का कहना है कि:

• बिजली की खपत कम होने के बावजूद बिल ज्यादा आ रहा है
• मीटर की रीडिंग सही नहीं दिख रही
• रिचार्ज जल्दी खत्म हो रहा है

क्या करेगी विशेषज्ञों की समिति?

मुख्यमंत्री ने बिलिंग और भुगतान प्रणाली को और अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाने पर जोर देते हुए निर्देश दिए कि उपभोक्ताओं को समय पर और सटीक बिल उपलब्ध कराने के लिए ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्मार्ट मीटरिंग प्रणाली को उपभोक्ता विश्वास के अनुरूप बनाने तथा शिकायतों के त्वरित एवं निष्पक्ष निस्तारण पर विशेष बल दिया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि ऊर्जा मंत्री एवं पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक स्वयं फील्ड में जाकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें और उपभोक्ताओं की समस्याओं का त्वरित व प्रभावी निराकरण सुनिश्चित कराएं। उन्होंने यह भी कहा कि टॉल फ्री हेल्पलाइन नंबर पूरी तरह सक्रिय रहें तथा प्राप्त शिकायतों का समुचित और समयबद्ध समाधान किया जाए, ताकि आम उपभोक्ता को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

उपभोक्ताओं को कैसे मिलेगा फायदा?

ग्रामीण क्षेत्रों के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि न्यूनतम 05 आवास वाले मजरों में भी विद्युतीकरण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही डबल ग्रुप सप्लाई एवं कृषि फीडर पृथक्करण के कार्यों को समयबद्ध पूर्ण किया जाए, ताकि ओवरलोडिंग की समस्या का समाधान हो सके। उपभोक्ता सेवाओं के अंतर्गत 1912 कॉल सेंटर, ऑनलाइन पोर्टल, सोशल मीडिया एवं व्हाट्सएप के माध्यम से शिकायत निस्तारण व्यवस्था को और प्रभावी बनाने तथा सिंगल विंडो मॉडल को व्यापक स्तर पर लागू करने के निर्देश दिए गए।

उत्पादन क्षमता के संतुलित विस्तार पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी तापीय इकाइयों को पूर्ण क्षमता के साथ संचालित रखा जाए तथा ग्रीष्मकालीन मांग के दृष्टिगत आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने कहा कि उत्पादन से जुड़े सभी मुद्दों का समयबद्ध समाधान किया जाए। बैठक में अवगत कराया गया कि प्रदेश में वर्तमान में 12,247 मेगावाट तापीय तथा 526.4 मेगावाट जल विद्युत क्षमता उपलब्ध है तथा वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच ₹3,143 करोड़ का संचयी लाभ अर्जित किया गया है। घाटमपुर की 660 मेगावाट इकाई अप्रैल में संचालन प्रारंभ करेगी। मुख्यमंत्री ने 5,600 मेगावाट की नई परियोजनाओं; मेजा, ओबरा-डी एवं अनपरा-ई को शीघ्र स्वीकृति देकर समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही 500 मेगावाट सौर एवं 50 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने तथा न्यूक्लियर पावर के लिए चल रहे सर्वेक्षण को शीघ्र पूर्ण करने को कहा।

स्मार्ट मीटर क्या होता है?

स्मार्ट मीटर एक डिजिटल बिजली मीटर होता है, जो बिजली की खपत को रियल टाइम में रिकॉर्ड करता है।

इसकी खास बातें:

• प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों सुविधा
• मोबाइल ऐप से रिचार्ज और मॉनिटरिंग
• सटीक रीडिंग
• बिजली उपयोग पर पूरा कंट्रोल

सरकार का क्या कहना है?

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि ट्रांसफार्मर बदलने की प्रक्रिया को और तेज किया जाए ताकि उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी न हो। उन्होंने यह भी कहा कि जहां नए विद्युत पोल लगाए जा रहे हैं, वहां उनकी गहराई, केबल की गुणवत्ता एवं अन्य तकनीकी मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही बिजली लाइनों को चरणबद्ध रूप से भूमिगत किए जाने की प्रक्रिया को और व्यवस्थित एवं गति देने के निर्देश दिए।

प्रिवेंटिव मेंटेनेंस को सुदृढ़ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि फॉल्ट-फ्री सप्लाई के लिए नियमित रखरखाव अनिवार्य है। बैठक में बताया गया कि प्री एवं पोस्ट मानसून अभियानों के परिणामस्वरूप वर्ष 2025-26 में पावर ट्रांसफॉर्मर क्षति में लगभग 80 प्रतिशत तथा बड़े वितरण ट्रांसफॉर्मरों की क्षति में लगभग 48 प्रतिशत की कमी आई है। स्मार्ट मीटरिंग एवं राजस्व सुधार की समीक्षा में बताया गया कि 84 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं तथा फीडर मीटरिंग में लगभग 95 प्रतिशत प्रगति हुई है।

उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सलाह

अगर आपको भी स्मार्ट मीटर से जुड़ी समस्या हो रही है, तो:

• अपनी खपत और बिल की नियमित जांच करें
• मोबाइल ऐप का सही इस्तेमाल करें
• किसी भी गड़बड़ी की शिकायत दर्ज कराएं
• अफवाहों से बचें और आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें

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