यूपी में डिजिटल अटेंडेंस का विरोध: प्राथमिक शिक्षक नाराज़, कई जिलों में वेतन रोकने के आदेश जारी

उत्तर प्रदेश के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में इन दिनों शिक्षकों और शिक्षा विभाग के बीच दिक्कत बढ़ गई है। डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम लागू होने के बाद से ही प्रदेशभर के शिक्षक (डिजिटल अटेंडेंस विवाद यूपी शिक्षक) इसका विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है की इस व्यवस्था के लागू होने से उन्हे परेशानियों का सामना करना पड रहा है और ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क की दिक्कतों के कारण यह सिस्टम ठीक से काम भी नहीं कर रहा है।

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क्या है मामला?

राज्य सरकार ने शिक्षकों की प्रेजेंट को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल अटेंडेंस ऐप की शुरुआत की है। इस ऐप के माध्यम से हर शिक्षक को डेली स्कूल पहुंचने और छुट्टी के समय अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। लेकिन कई शिक्षकों का कहना है कि दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी सही नहीं है, जिससे वे समय पर उपस्थिति दर्ज नहीं कर पाते और जिसका असर उनके वेतन और सेवा रिकॉर्ड पर पड़ रहा है।

डिजिटल अटेंडेंस विवाद यूपी शिक्षक
डिजिटल अटेंडेंस विवाद यूपी शिक्षक

शिक्षकों का कहना है…

शिक्षकों ने कहा कि बच्चों की ऑनलाइन हाजिरी में कई तरह की समस्याएं आ रही हैं। ग्रामीण परिवेश में अक्सर नेटवर्क की समस्या रहती है। एक ही समय पर प्रदेश भर के बच्चों की ऑनलाइन हाजिरी देने से ऐप के चलने में समस्या आती है। जूनियर हाई स्कूल की बालिकाओं की फोटो के साथ ऑनलाइन हाजिरी देना भी सही नहीं है। कभी-कभी मौसम खराब होने से बच्चों की उपस्थिति काफी कम भी हो जाती है।

बीएसए का रुख सख्त

इधर, कुछ जिलों में बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) ने सख्ती दिखाते हुए डिजिटल उपस्थिति न दर्ज करने वाले शिक्षकों का वेतन रोकने के आदेश निकाल दिया हैं। इस फैसले के बाद से शिक्षकों में नाराजगी और बढ़ गई है।

क्यों जरूरी है डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम?

सरकार का मानना है कि यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए सही है। कई बार शिकायतें आती थीं कि शिक्षक स्कूलों में समय पर पहुंचते ही नहीं हैं। ऐसे में डिजिटल अटेंडेंस से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी शिक्षक नियमित रूप से उपस्थित रहें और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो सके।

डिजिटल अटेंडेंस विवाद यूपी शिक्षक
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निष्कर्ष (Conclusion)

डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम का मकसद शिक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सशक्त बनाना है, लेकिन जब यह शिक्षकों के लिए परेशानी बन जाए, तो सुधार की ज़रूरत अनिवार्य हो जाती है। सरकार और शिक्षकों के बीच बातचीत से ही इसका कोई सही समाधान निकल सकता है। देखिए आगे क्या रिजल्ट निकलता है, इसपे अपडेट रहने के लिए हमारी वेबसाईट के Notification को Allow कर ले धन्यवाद !

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